Gandhi Jayanti 2020 Speech, Essay, Quotes, slogan, instagram status,

Gandhi Jayanti 2020 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Slogan, Quotes in Hindi: पूरी दुनिया को सत्य और अहिंसा का रास्ता दिखाने वाले महात्मा गांधी ने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने में जी-जान लगा दिया। उन्होंने लोगों के बीच देशभक्ति की अलख जगाने के साथ ही, नस्लीय व जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों पर भी हमला किया। वे हमेशा कहते थे कि किसी भी तरह के विरोध का मार्ग हिंसात्मक नहीं हो सकता है। अहिंसा में जो शक्ति है, उसकी जगह हिंसा कभी नहीं ले सकती है। इन्हीं विचारों के बूते दुनियाभर में उनकी ख्याति फैली।

भारत के लोग ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के तमाम महान शख़्सियत गांधी जी के व्यक्तित्व से प्रभावित थे। 1909 में गांधी जी ने महान साहित्यकार लियो टॉलस्टॉय को खत लिखकर साउथ अफ़्रीका में अपने द्वारा चलाये गए सविनय अवज्ञा आंदोलन के बारे में बताया था। कई लोग ऐसा भी मानते हैं कि गांधी जी पर टॉलस्टॉय की विचारधारा का बेहद प्रभाव पड़ा था।


इस खत के बारे में अपनी डायरी में टॉलस्टॉय ने लिखा है कि, ‘आज मुझे एक हिंदू द्वारा लिखा हुआ रोचक पत्र मिला है।’ इसके जवाब में उन्होंने गांधी को लिखा, ‘मुझे अभी आपके द्वारा भेजा गया दिलचस्प पत्र मिला है और इसे पढ़कर मुझे अत्यंत ख़ुशी हुई। ईश्वर हमारे उन सब भाइयों की मदद करे जो ट्रांसवाल में संघर्ष कर रहे हैं. सौम्यता’ का ‘कठोरता’ से संघर्ष, ‘प्रेम’ का ‘हिंसा’ से संघर्ष हम सभी यहां पर भी महसूस कर रहे हैं….. मैं, आप सभी का अभिवादन करता हूं।’

गांधी जयंती के मौके पर निबंध और भाषण के कुछ सैंपल आप यहां से देख सकते हैं –

Speech 1: हमारा देश महान स्त्रियों और पुरुषों का देश है, जिन्होंने देश के लिए ऐसे आदर्श कार्य किए हैं जिन्हें भारतवासी सदा याद रखेंगे। कई महापुरुषों ने हमारी आजादी की लड़ाई में अपना तन-मन-धन परिवार सब कुछ अर्पण कर दिया। ऐसे ही महापुरुषों में से एक थे महात्मा गांधी। महात्मा गांधी युग पुरुष थे जिनके प्रति पूरा विश्व आदर की भावना रखता था। इस महापुरुष का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 को गुजरात में पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास था। आपके पिता कर्मचंद गांधी राजकोट के दीवान थे। माता पुतलीबाई धार्मिक स्वभाव वाली अत्यंत सरल महिला थी। मोहनदास के व्यक्तित्व पर माता के चरित्र की छाप स्पष्ट दिखाई दी।

Speech 2: 2 अक्टूबर सन् 1869 को गुजरात के पोरबंदर में युगपुरुष मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में पूर्ण करने के पश्चात राजकोट से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर आप वकालत करने इंग्लैंड चले गए। वकालत करके लौटने पर वकालत प्रारंभ की। एक मुकदमे के दौरान उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहां भारतीयों की दुर्दशा देख बड़े दुखी हुए। इसके बाद ही उनमें राष्ट्रीय भावना जागी और वे भारतवासियों की सेवा में जुट गए। अंग्रेजों की कुटिल नीति तथा अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध गांधीजी ने सत्याग्रह आंदोलन आरंभ किए। असहयोग आंदोलन एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किया।



गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट से शुरू हुई। उन्होंने सन 1881 में हाई स्कूल में एडमिशन लिया। सन 1887 में गांधीजी ने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में प्रवेश लिया। लेकिन परिवार वालों के कहने पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैंड जाने का फैसला किया। इंग्लैंड में उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की और सन् 1891 में वो बैरिस्ट्रर बनकर भारत लौटे।

जब बापू ने की थी किसानों की मदद...


सन 1918 में गुजरात के खेड़ा नाम के गांव में बाढ़ आ गई थी। इस वजह से किसानों की फसल तबाह हो गई। किसान ब्रिटिश सरकार को टैक्स देने में अक्षम हो गए। तब गांधीजी ने किसानों को टैक्स से छूट दिलाने के लिए खेड़ा आंदोलन किया। उस समय किसानों समेत देश की बाकी जनता ने भी गांधीजी का समर्थन किया। आखिरकार मई 1918 में ब्रिटिश सरकार ने टैक्स के नियमों में संशोधन कर किसानों को टैक्स में राहत देने की घोषणा की।


ये थे मुख्य आंदोलन व मुहिम


गांधी जी ने स्वराज्य प्राप्ति, समाज से अस्पृश्यता को हटाने, दूसरी सामाजिक बुराईयों को मिटाने, किसानों के आर्थिक स्थिति को सुधारने में, महिला सशक्तिकरण आदि के लिये बहुत ही महान कार्य किये है। ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्ति में भारतीय लोगों की मदद के लिये इनके द्वारा 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह और 1942 में भारत छोड़ो आदि आंदोलन चलाये गये। अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिये उनका भारत छोड़ो आंदोलन एक आदेश स्वरुप था।


देश को समर्पित किया अपना जीवन


पूरे विश्व में बापू के दर्शन, अहिंसा में भरोसा, सिद्धांत आदि को फैलाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में गाँधी जयंती को मनाने का लक्ष्य है। विश्वभर में लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये उचित क्रियाकलापों पर आधारित विषय-वस्तु के द्वारा इसे मनाया जाता है। भारतीय स्वतंत्रता में उनके योगदानों और महात्मा गाँधी के यादगार जीवन को समाहित करता है गाँधी जयंती। इनका जन्म एक छोटे से तटीय शहर (पोरबंदर, गुजरात) में हुआ था, इन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिये समर्पित कर दिया जो आज के आधुनिक युग में भी लोगों को प्रभावित करता है।


13 साल में हुई थी शादी


गांधी जी पुतलीबाई और करमचंद गांधी के तीन बेटों में सबसे छोटे बेटे थे। मोहनदास एक औसत विद्यार्थी थे, हालांकि उन्होंने कई बार पुरस्कार और छात्रवृत्तियां भी हासिल की है। गांधी जी पढ़ाई और खेल दोनों में ही तेज नहीं थे। बीमार पिता की सेवा करना, घरेलू कामों में मां का हाथ बंटाना और समय मिलने पर दूर तक अकेले सैर पर निकलना उन्हें बेहद पसंद था। गांधी जी जब 13 साल के थे, और स्कूल में पढ़ते थे तभी उनकी शादी कस्तूरबा से हुई थी।


नमक सत्याग्रह आंदोलन


बापू ने कई आंदोलन किए थे और सारे आंदोलन देश को आजादी दिलाने के लिए थे जो सफल हुए थे। पहले आंदोलन की शुरुआत 1919 से कहा जा सकता है। 1919 में जलियांवाला बाग कांड के विरोध में आंदोलन हुआ था। जिसमें देशवासियों ने बापू का पूरा साथ दिया था। उसके बाद गांधी जी ने नमक सत्यग्रह की शुरुआत की जो सफल रहा।


गांधी जी ने कई महान शख्सियत को किया है प्रभावित


वह बहुत सारे राजनीतिक नेताओं खासतौर से देश के युवाओं के लिये प्रेरणादायी और अनुकरणीय व्यक्ति है। दूसरे महान नेता जैसे मार्टिन लूथर किंग, नेल्सन मंडेला, जेम्स लॉसन आदि महात्मा गाँधी की अहिंसा और स्वतंत्रता की लड़ाई के लिये शांतिपूर्ण तरीकों से प्रेरित हुए।


राष्ट्रीय उत्सव गांधी जयंती


सरकारी अधिकारियों द्वारा नई दिल्ली में गाँधीजी की समाधि या राजघाट पर बहुत तैयारियों के साथ गाँधी जयंती मनायी जाती है। राजघाट के समाधि स्थल को फूलों की माला तथा फूलों से सजाया जाता है तथा इस महान नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। समाधि पर सुबह के समय धार्मिक प्रार्थना भी रखी जाती है। इसे पूरे देशभर में स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थीयों के द्वारा खासतौर से राष्ट्रीय उत्सव के रुप में मनाया जाता है।

लोगों के दिलों में जिंदा हैं बापू


मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें राष्ट्रपिता के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। ये काफी कम लोग जानते हैं कि 2 अक्टूबर को हर साल विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने अहिंसा आंदोलन के दम पर अंग्रेजों से देश को आज़ाद करा दिया था। इसलिए बापू आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं।


2 अक्टूबर है खास


हर साल २ अक्टूबर को हम पूरे हर्षोल्लास के साथ गांधी जयंती मानते हैं। इस दिन सरकारी अधिकारियों द्वारा दिल्ली के राजघाट पर तैयारियां की जाती हैं। राजघाट महात्मा गांधी का समाधी स्थल है। इस दिन राजघाट के समाधि स्थल को फूलों से सजाया जाता है और देश के सभी नेता राजघाट पर आकर देश के राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते है। समाधि के स्थान पर 2 अक्टूबर को सुबह प्रार्थना भी होती है।


अस्पृश्यता के घोर खिलाफ थे...


उनके अनुसार, ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता की लड़ाई जीतने के लिये अहिंसा और सच्चाई ही एकमात्र हथियार है। वह कई बार जेल भी गये हालाँकि देश को आजादी मिलने तक उन्होंने अपने अहिंसा आंदोलन को जारी रखा। वह हमेशा सामाजिक समानता में भरोसा रखते थे इसीलिये अस्पृश्यता के घोर खिलाफ थे।


राष्ट्रपिता तथा बापू के रुप में प्रसिद्ध...


तीसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम के रुप में हर साल गाँधी जयंती को मनाया जाता है। महात्मा गाँधी जन्म दिवस पर को उनको श्रद्धांजलि देने के लिये पूरे देश के भारतीय लोगों द्वारा 2 अक्टूबर को इसे मनाया जाता है। गाँधी देश के राष्ट्रपिता तथा बापू के रुप में प्रसिद्ध है। वो एक देशभक्त नेता थे और अहिंसा के पथ पर चलते हुए पूरे देश का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में नेतृत्व किया।


सत्य और अहिंसा...


महात्मा गांधी हमारे देश के ऐसे महान पुरुष थे, जिन्होंने अपना सम्पुर्ण परोपकार में ही लगा दिया। वे एक ऐसे दिव्य विभूति थे, जिन्होंने परतंत्रता की बेड़ी ही तोड़ने के लिए सत्य और अहिंसा का अमोध अस्त्र प्रदान किया। ब्रिटिश साम्राज्य की अपार शक्ति और प्रभाव को इस अमोध अस्त्र से प्रभावहीन करके विश्व इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। उनके इस अदभुत अस्त्र को सम्पूर्ण विश्व ने सहर्ष स्वीकार किया। समस्त विश्व में उन्हें एक चमत्कारी पुरुष ही नही, अपितु एक अवतारी, महापुरुष के रूप उन्हें सम्मान के भाव से देखा और अनुभव किया जाता है।

Gandhi Jayanti 2020: गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस


15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गयी थी। इस विशेष दिन को देश में राष्ट्रीय अवकाश भी मनाया जाता है। हालाँकि स्कूलों में, दफ्तरों में गाँधी जयंती के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है जहाँ पर गाँधी जी के जीवन के बारे में जुड़े तथ्य आदि बनाते जाते हैं, निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।

गांधी जयंती पर क्या होता है विशेष


2 अक्टूबर के दिन राजधानी दिल्ली में अदभुत रूप में गांधी जयंती मनाई जाती है। इस दिन प्रातः काल महात्मा गांधी जी की समाधि राजघाट पर एक से एक महान व्यक्ति पुष्प चढ़ाते है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते है।

देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, भूतपूर्व-प्रधानमंत्री, गण्यमान्य राजनेताओं सहित अनेक समाज-सेवी और राष्टभक्त गांधी समाधि राजघाट पर जाकर पुष्पांजलि के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वहाँ पर महात्मा गांधी के प्रति श्रंद्धाभाव से प्राथना-सभा भी होती है।

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