आज से दिल्ली हाईकोर्ट में मौजदूगी में सुनवाई आंशिक तौर पर शुरू

राष्ट्रीय राजधानी की दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार से पांच पीठों ने नियमित सुनवाई की शुरुआत कर दी है। कोविड-19 महामारी के प्रकोप की वजह से करीब चार महीनों से मौजूदगी में सुनवाई नहीं हो रही थी और मामलों पर केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही अदालत सुनवाई कर रही थी। अब अनलॉक के चौथे चरण के समय शारीरिक तौर पर मौजूदगी में सुनवाई आंशिक रूप से शुरू हो गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल मनोज जैन ने एक बयान में कहा, इस न्यायालय द्वारा अनुमोदित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में निहित निर्देशों के अनुसार, विभिन्न बैच के मामलों के लिए शारीरिक सुनवाई में भाग लेने के लिए अदालतों के प्रवेश समय (एंट्री टाइम) को समय स्लॉट के अनुसार क्रम में रखा जाएगा। बयान में आगे कहा गया है कि प्रत्येक बैच में 10 मामले शामिल होंगे। कोर्ट ब्लॉक के विशेष तल पर पहले बैच का प्रवेश सुबह 10 बजे से होगा। दूसरे बैच को कोर्ट ब्लॉक के अंदर नामित वेटिंग स्पेस में सुबह 11.15 बजे और तीसरे बैच को 12.15 बजे प्रवेश की अनुमति होगी।
जैन ने कहा, किसी भी व्यक्ति को निर्दिष्ट समय स्लॉट से पहले अदालत के ब्लॉक के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी संबंधितों से सहयोग का अनुरोध किया जाता है। पांच पीठों के लिए रोटेशन के आधार पर सदेह मौजूदगी में सुनवाई शुरू हुई है, जबकि शेष पीठ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामलों पर सुनवाई करती रहेंगी। मंगलवार से न्यायमूर्ति प्रतीक जालान के साथ मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल की अध्यक्षता वाली पीठ सहित दो खंडपीठों और तीन एकल न्यायाधीशों वाली खंडपीठों ने सुनवाई शुरू कर दी है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन पीठ के अलावा, न्यायाधीश विपिन सांघी और रजनीश भटनागर की अध्यक्षता वाली डिवीजन पीठ के साथ ही एकल पीठों में न्यायाधीश जयंत नाथ, न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायाधीश योगेश खन्ना ने मंगलवार को फिजिकल कोर्ट से सुनवाई शुरू की। देश में कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर केंद्र द्वारा लगाए गए राष्ट्रव्यापी बंद के बाद, हाईकोर्ट ने 23 मार्च से अपने कामकाज को निलंबित कर दिया था। हालांकि, इस इस दौरान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई जारी रखी।
एक अप्रैल से 31 जुलाई तक, दिल्ली हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पीठ के समक्ष 13,000 मामलों को सूचीबद्ध किया। पक्षों को सुनने पर, लगभग 2,800 मुख्य मामलों और लगभग 11,000 विविध मामलों का निपटान किया गया। इस अवधि के दौरान, रजिस्ट्री ने लगभग 21,000 नए मुख्य मामलों/विविध मामलों के पंजीकरण को भी अंजाम दिया। इस अवधि के दौरान 155 पीआईएल मामलों का निपटारा किया गया।


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