Best Biography of Bhagat Singh 2020

 पूरा देश आज क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की जयंती मना रहा है। देश में क्रांति लाने के मजबूत इरादों से अंग्रेजों के शासन को झकझोर कर रख देने वाले क्रांतिकारी नौजवान को आज एक कृतज्ञ राष्ट्र याद कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई अन्य बड़े राजनेताओं, राजनीतिक दलों और मशहूर हस्तियों ने भगत सिंह को उनकी जयंती पर याद किया और अपनी श्रद्धांजलि दी है। 

भगत सिंह का सफर
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था। यह स्थान पर पाकिस्तान का हिस्सा है। हर भारतीय की तरह भगत सिंह का परिवार भी आजादी का पैरोकार था। उनके चाचा अजीत सिंह और श्वान सिंह भी आजादी के मतवाले थे और करतार सिंह सराभा के नेतृत्व में गदर पाटी के सदस्य थे।

अपने घर में क्रांतिकारियों की मौजूदगी से भगत सिंह पर गहरा प्रभाव पड़ा। इन दोनों का असर था कि वे बचपन से ही अंग्रेजों से घृणा करने लगे। 14 वर्ष की उम्र में भगत सिंह ने सरकारी स्कूलों की पुस्तकें और कपड़े जला दिए। जिसके बाद भगत सिंह के पोस्टर गांवों में छपने लगे। 

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह पर अमिट छाप छोड़ा। भगत सिंह ने लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और 1920 में महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन में शामिल हो गए। इस आंदोलन में गांधी जी विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर रहे थे। 

भगत सिंह महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे अहिंसा आंदोलन और भारतीय नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य थे। लेकिन जब 1921 में हुए चौरा-चौरा हत्याकांड के बाद गांधीजी ने हिंसा में शामिल सत्याग्रहियों का साथ नहीं दिया। इस घटना के बाद भगत सिंह का गांधी जी से मतभेद हो गया। इसके बाद अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में बने गदर दल में शामिल हो गए। 9 अगस्त, 1925 को सरकारी खजाने को लूटने की घटना में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई थी। यह घटना इतिहास में काकोरी कांड नाम से मशहू है। इसमें उनके साथ रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद जैसे कई क्रांतिकारी शामिल थे। 

भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज अधिकाकी जेपी सांडर्स की हत्या कर दी थी। इस हत्या को अंजाम देने में चंद्रशेखर आजाद ने उनकी पूरी मदद की। 

अंग्रेजों की सरकार को 'नींद से जगाने के लिए' उन्होंने 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली के सभागार में बम और पर्चे फेंके थे। इस घटना में भगत सिंह के साथ क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त भी शामिल थे। और यह जगह अलीपुर रोड दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेंबली का सभागार थी। 

लाहौर षड़यंत्र केस में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी की सजा सुनाई गई और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास दिया गया। भगत सिंह को 23 मार्च, 1931 की शाम सात बजे सुखदेव और राजगुरू के साथ फांसी पर लटका दिया गया। तीनों ने हंसते-हंसते देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। 

लेखक भी थे भगत सिंह 
भगत सिंह सिंह आजादी के मतवाले ही नहीं थे। भगत सिंह एक अच्छे वक्ता, पाठक, लेखक और पत्रकार भी थे। वे हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, उर्दू, बंगला और आयरिश भाषा के बड़े विद्वान थे। उन्होंने 23 वर्ष की उम्र में आयरलैंड, फ्रांस और रूस की क्रांति का के बारे गहरा अध्ययन कर लिया था। भगत सिंह को भारत में समाजवाद का पहला प्रवक्ता माना जाता है। 

भगत सिंह ने लगभग दो वर्ष जेल में बिताया। जेल में रहते हुए भी किताबों के प्रति उनका लगाव बरकरार था। वे जेल में लेख लिखकर अपने क्रांतिकारी विचार अपने साथियों तक पहुंचाते रहे। उनके लिखे गए लेख और परिवार को लिखे गए पत्र आज भी उनके विचारों का आइना हैं। 

उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा और संपादन भी किया। उन्होंने 'अकाली' और 'कीर्ति' दो अखबारों का संपादन भी किया। उनकी कृतियों के कई संकलन भी प्रकाशित हुए। उनमें 'एक शहीद की जेल नोटबुक, सरदार भगत सिंह : पत्र और दस्तावेज, भगत सिंह के संपूर्ण दस्तावेज प्रमुख हैं। 

Read Also

© Copyright Post
❤️ Thanks for Visit ❤️

Popular Posts

NEET Result 2020 Name Wise (Released) NTA NEET UG Result September 2020 By Name Wise’ Cut Off’ Merit List At Ntaneet.Nic.In

Bolly4u.org—bolly4u - bolly4u.tread - bolly4u.cc - 300Mb Dual Audio movies Worldfree4u - 9xmovies - World4ufree - Khatrimaza Free Movies

Dr. APJ Abdul Kalam Birthday Wishes Shayari Message Quotes Photo Pics Images Status For Facebook Whatsapp & Social Media Post